मेक इन इंडिया के नाम पर खाली हाथ रही रेलवे

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रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अपना दूसरा और राजग सरकार का तीसरा रेल बजट पेश कर दिया। बजट में आम आदमी की कुछ उम्‍मीदें पूरी हुई तो कुछ मायूसी भी हाथ लगी। हालांकि पहले रेल बजट की अपेक्षा इस बजट में प्रभु ने बुनियादी सुविधाओं को सुधारने और सफर को सुगम बनाने पर ध्यान दिया है।

मसलन, ट्रेनों में एलईडी डिस्‍प्ले और एफएम जैसी सुविधाएं देने पर भी चर्चा हुई तो गूगल की मदद से 400 स्टेशनों पर वाईफाई जैसी सुविधाएं देने का भी जिक्र किया गया। प्रभु के इस बजट पर मोदी के विजन डिजिटल इंडिया की तो छाप दिखाई दी लेकिन उनके महत्वाकांक्षी अभियान मेक इन इंडिया को इस बार पूरी तरह भुला दिया गया। 

बजट में जिन आधारभूत सुविधाओं को बढ़ाने का जिक्र किया गया उनका विकास विदेशी या अन्य बाहरी मदद से ही किया जाएगा, मेक इन इंडिया से नहीं।

हालांकि रेल मंत्री ने बजट के दौरान मेक इन इंडिया के तहत दो रेल इंजन कारखाने लगाने की बात तो कही जिसके लिए‌ बिड़ प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन उस पर भी यूपीए सरकार के पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने उंगली उठा दी। पवन बंसल ने कहा कि यह योजना भी पूर्ववर्ती सरकार की है मोदी सरकार की नहीं।

बिहार में 40 हजार की लागत से स्‍थापित होने वाले रेल इंजन कारखाने से 9 करोड़ रोजगार दिवस का वादा किया गया है। मोदी सरकार इसे मेक इन इंडिया के रूप में बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रही है जबकि प्रभु रेलवे के जिस कायाकल्प का सपना देख रहे हैं उसमें मेक इन इं‌डिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

क्योंकि रेलवे के कायाकल्प में सुविधाओं में गुणोत्तर वृद्िध होनी है। इस बार के बजट पर ही गौर करें तो सरकार ने कई चीजों की घोषणा की है, मसलन ट्रेनों में 17 हजार बायो टॉयलेट्स लगाने की घोषणा की गई है। लेकिन यह नहीं बताया गया कि ये टॉयलेट्स भारत में ही तैयार किए जाएंगे या बाहर से मंगवाए जाएंगे।
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